Longinus's rhetorical criteria and Burke's sensory-emotional framework: A Comparison
जब हम एक विशाल, तूफ़ान से घिरे पहाड़ को देखते हैं, तो हम एक गहरा, रोमांचित कर देने वाला अनुभव महसूस करते हैं। सदियों से, विचारकों ने यह समझाने की कोशिश की है कि कुछ चीज़ें हमें इतनी गहराई से क्यों झकझोर देती हैं। इसे समझने के लिए दो सबसे बेहतरीन मार्गदर्शक हैं: लोंगिनस, जो एक प्राचीन ग्रीक शिक्षक थे, और एडमंड बर्क, जो अठारहवीं सदी के एक दार्शनिक थे। लोंगिनस का ध्यान इस बात पर है कि कैसे महान शब्द हमारी आत्मा को ऊपर उठाते हैं, जबकि बर्क इस बात पर ध्यान देते हैं कि कैसे शारीरिक संवेदनाएं हमारे गहरे डर को जगाती हैं। साथ में, वे हमें एक ही शक्तिशाली अनुभव तक पहुँचने के दो अलग-अलग रास्ते दिखाते हैं: "उदात्त" (द सब्लइम)। लोंगिनस का मानना है कि महानता दिमाग से पैदा होती है और भाषा के माध्यम से बहती है। उनके अनुसार, कला का भावनात्मक प्रभाव आत्मा को अचानक एक नई ऊंचाई पर ले जाना है। जब हम कोई बेहद महान विचार या खूबसूरती से सजाया गया वाक्य सुनते हैं, तो वह हमें बिजली की तरह छू जाता है। हम सिर्फ सुनते नहीं हैं; हम खुद को ऊपर उठा हुआ महसूस करते हैं, जैसे कि वह महान विचार हमने खुद ही बनाया...